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बेहतर डिजाइन क्षरण का मुकाबला करने में कैसे मदद करती है

क्षरण का नियंत्रण करने के लिए सामग्री का चयन करना प्रमुख उपाय है, लेकिन बेहतर डिजाइन के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता. एक बेहतर डिजाइन जो हर बात का ध्यान रखती है. क्षरण का अभिशाप धातु की डिजाइन में जंग लगने की संभावना को उल्लेखनीय रूप से बढा सकता है.

क्षरण से बचने के लिए कुछ बातों पर मेटैलिक आर्किटेक्चर्स और शोपीसेस के डिजाइनर्स को ध्यान देना चाहिए. क्षरण के नियंत्रण के लिए डिजाइनर द्वारा ध्यान में रखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं:

जल निकासी सुनिश्चित करना

क्षरण का प्रमुख कार नमी है, है ना? इसीलिए स्टोरेज कंटेनर्स जैसे कि टंकियों के लिए ये आवश्यक है कि इन्हें इस प्रकार से बनाया जाय कि जिन्हें आसानी से साफ किया जा सके और निथारा जा सके. ऐसा होने के लिए, उनके डिजाइनर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नल ऐसी जगह पर लगाया जहां से द्रव की अंतिम बूंद तक बाहर निकल आए, ताकि वह साफ रहे. डिजाइनर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि टैंक को रखने की जगह के अनुसार वह ठीक से लगाया और डिजाइन किया जाय.

तापमान में गिरावट को न्यूनतम करना

हीट ट्रांसपोर्ट के उपकरण के डिजाइनर्स को क्षरण नियंत्रण के प्रयोजन के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सामग्रियों की सतहों पर ठंडे और गर्म स्थान न बनने पाएं. उपकरण को इस तरह से डिजाइन किया जाना चाहिए कि सतह में कम या बिलकुल बदलाव न हो. तापमान में बदलावों के कारण गर्म और ठंडे धब्बे बनते हैं, ये दोनों ही क्षरण के प्रति संवेदनशील होते हैं. उदाहरण के लिए, गर्म स्थानों को थर्मो-गल्वानिक क्षरण का सामना करना पड़ता है, जब कि ठंडी जगहों के कारण संघनन की क्रिया होती है और जैसा कि हम सभी को पता है उसके कारण नमी पैदा होती है जिसका यदि ख्याल नहीं रखा जाता है तो क्षरण होता है.

दीवारों की मोटाई के साथ तालमेल बिठाना

क्षरण के नियंत्रण के लिए, डिजाइनर्स को दीवारों की मोटाई में तालमेल बिठाने की सलाह दी जाती है. मेरे कहने का मतलब ये है कि क्षरण लगातार धातु को खत्म करता जाता है और उसकी मोटाई घटती जाती है. इसीलिए, दीवारों की मोटाई दुगुनी डिजाइन की जा सकती है.

यह क्षरण को नियंत्रित करने का एक सामान्य तरीका है जिसका उपयोग डिजाइनर्स करते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि ऐसी रणनीति हमेशा व्यावहारिक नहीं होती. ऐसा इसीलिए क्योंकि किसी भी डिजाइन की दीवारों की मोटाई को वजन, तनाव और दाब की मेकैनिकल जरूरतों को पूरा करना चाहिए.

क्षरण को नियंत्रित करने का एक सामान्य तरीका है जिसका उपयोग डिजाइनर्स करते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि ऐसी रणनीति हमेशा व्यावहारिक नहीं होती. ऐसा इसीलिए क्योंकि किसी भी डिजाइन की दीवारों की मोटाई को वजन, तनाव और दाब की मेकैनिकल जरूरतों को पूरा करना चाहिए.

यह पद्धति असामान्य होने का एक और कारण ये तथ्य है कि इसके कारण आर्किटेक्चर की लागत में काफी वृद्धि हो जाती है. क्या ऐसी बढ़ोतरी हमेशा वाजिब होती है? नहीं, बिलकुल नहीं.

इसीलिए, यह समझने के लिए लागत-लाभ का विश्लेषण करना आवश्यक होता है कि क्या बढ़ी हुई लागत के साथ निर्मित उपयोगिता समुचित है या नहीं.

डिजाइनर्स सलाह देते हैं कि उनके ग्राहकों को अपने धातु के आर्किटेक्चर्स पर डब्ल्यूडी-४० की परत कभी कभार लगानी चाहिए, ताकि सुनिश्चित हो कि उससे क्षरण को कम करने में मदद मिले.

गड्ढों (कैविटीज़) को न्यूनतम करना

नहीं, हम दॉंतों में पड़नेवाले गड्ढों (कैविटीज़) की बात नहीं कर रहे हैं; आर्किटेक्चर में भी गडढों को न्यूनतम करना महत्वपूर्ण है. छोटे गड्ढे और कोनों वाली डिजाइनों में नमी जुटती है, और यह भी सच है कि इन गड्ढों में से हवा मुक्त रूप से नहीं गुजर सकती. इसका ये अर्थ है कि आप इन गड्ढों को साफ करने के लिए पर्याप्त समय नहं दे पाते और जल्द ही उनमें पीलापन दिखाई देने लगता है. डिजाइनर्स को अपने आर्किटेक्चर्स में जितना हो सके कैविटीज और कोनों को सीमित रखने की कोशिश करनी चाहिए.

सभी ग्राहकों को क्षरण का नियंत्रण करने के लिए डब्ल्यूडी-४० की सिफारिश की जाती है, ताकि उन्हें पहले चर्चा की गई समस्याओं का सामना न करना पड़े.

वातावरण को समझना

डिजाइनर्स को यह तथ्य समझना होगा कि उनकी डिजाइन्स खुले वातावरण में रहेंगी और ये वातावरणीय तत्वों के सीधे संपर्क में आएंगी. पर्यावरण को विचार में लेते हुए डिजाइन्स तय करना महत्वपूर्ण हो जाता है. यदि समुद्र किनारे रहनेवाला कोई व्यक्ति धातु का शोपीस खरीदता है तो डिजाइनर के लिए उस सामग्री का उपयोग इस तरह से करना चाहिए कि ऐसे वातावरण में क्षरण पर नियंत्रण प्रदान किया जा सके. फिर भी, सुरक्षा की दृष्टि से क्षरण के नियंत्रण के लिए शोपीसेस पर डब्ल्यूडी-४० का उपयोग करने की सलाह दी जाती है.

बोल्टिंग के बजाय वेल्डिंग

क्या आपने कभी कोई ऐसा जोड़ देखा है जो जंग लगे स्क्रू के साथ भी अपनी जगह पर बना रहे? क्या आप नहीं चाहते हैं कि ऐसा दृश्य दिखने पर जोड़ों की वेल्डिंग की जाय? डिजाइनर्स को डिजाइनिंग करते समय यह बात ध्यान में रखनी चाहिए. क्यों? जी हां, क्योंकि जुटनेवाली नमी के चलते बोल्ट्स और स्क्रू में तेजी से जंग लगता है. इसका मतलब है कि धातु की डिजाइन्स में सिर्फ तभी बोल्ट्स लगाए जाने चाहिए यदि उनकी बेहद जरूरत महसूस हो. तब भी, हवा के आवागमन के लिए पर्याप्त जगह छोडने की जरूरत होती है ताकि नमी आसानी से जुटने न पाए और क्षरण की प्रक्रिया में विलंब हो.

जब आप क्षरण को नियंत्रित करने के लिए डिजाइनर्स द्वारा अपनाए जानेवाले उपायों की तरफ देखते हैं तो आपको सहज ही ध्यान में आता है कि डब्ल्यूडी-४० यह काम आसानी से करता है. ये कमाल का असर दिखाता है.

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डब्ल्यूडी-40 प्रोडक्ट्स के लिए बताए गए और प्रदर्शित उपयोग डब्ल्यूडी-40 कंपनी को खुद उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रदान किए गए हैं। इन उपयोगों को डब्ल्यूडी-40 कंपनी द्वारा परखा नहीं गया है और इसे डब्ल्यूडी-40 कंपनी द्वारा उपयोग के लिए सुझाव की सिफारिश नहीं माना जाना चाहिए। डब्ल्यूडी-40 कंपनी के उत्पादों का उपयोग करते समय सामान्य ज्ञान का उपयोग किया जाना चाहिए। हमेशा निर्देशों का पालन करें और पैकेजिंग पर छपी चेतावनियों पर ध्यान दें।

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